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30 जून 2014 तक संशोधित अधिसूचना - बंधक गारंटी कंपनी (मार्गेज गारंटी कंपनी) (रिज़र्व बैंक) मार्गदर्शी सिद्धांत , 2008

भारिबैं/2014-15/49
गैबैंपवि (नीति प्रभा. एमजीसी) कंपरि. सं. 19/23.11.001/2014-15

1 जुलाई 2014

अध्यक्ष/मुख्य कार्यपालक अधिकारी
सभी बंधक गारंटी कंपनियाँ

महोदय,

30 जून 2014 तक संशोधित अधिसूचना - बंधक गारंटी कंपनी
(मार्गेज गारंटी कंपनी) (रिज़र्व बैंक) मार्गदर्शी सिद्धांत , 2008

आपको ज्ञात है कि उल्लिखित विषय पर सभी मौजूदा अनुदेश एक स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक परिपत्र/अधिसूचनाएं जारी करता है। 15 फरवरी 2008 की अधिसूचना सं.गैबैंपवि.(एमजीसी).3/मुमप्र(पीके)-2008 में अंतर्विष्ट अनुदेश, जो 30 जून 2014 तक अद्यतन हैं, पुन: नीचे दिए जा रहे हैं। अद्यतन की गई अधिसूचना बैंक की वेब साइट (http://www. rbi. org.in). पर भी उपलब्ध है।

भवदीय

(के के वोहरा)
प्रधान मुख्य महाप्रबंधक


विषय वस्तु

पैरा नं.

ब्योरा

1

संक्षिप्त नाम, निदेशो का प्रारंभ और उनकी प्रयोज्यता

2

विस्तार/व्याप्ति

3

परिभाषा

4

भारतीय रिज़र्व बैंक से पंजीकरण

5

बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी की आवश्यक विशेषताए

6

न्यूनतम पूंजी अपेक्षा

7

पूंजी पर्याप्तता

8

विवेकपूर्ण तथा लेखा मानदंड

9

निधीय विकल्प

10

आकस्मिक प्रारक्षित का सृजन और रख रखाव

11

अनर्जित प्रीमियम का लेखाकरण

12

आहूत गारंटी से हुई हानि के लिए किया गया प्रावधान

13

हानि जो हुई किंतु रिपोर्ट नहीं की गई- इसके लिए प्रावधान (आईबीएनआर)

14

गारंतियों को दर्ज करने के लिए रजिस्टर रखना

15

बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी का दायित्व

16

बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा समुचित सावधानी बरतना/ डियु डिलिजेंस

17

निषेध

18

कमीशन, छूट/रियायत या प्रोत्साहन नहीं देना

19

मार्गेज प्रारंभ करने वाली संबंधित पार्टियों को गारंटी देने पर रोक

20

निवेश

21

लेखा परीक्षा समिति का गठन

22

गारंटी प्रदान करने के लिए नीति

23

बंधक (मार्गेज) गारंटी योजना

24

प्रति गारंटी

25

छूट

भारतीय रिज़र्व बैंक
गैर-बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग
केंद्रीय कार्यालय
सेंटर-1, विश्व व्यापार केंद्र
कफ परेड, कोलाबा
मुंबई-400 005

अधिसूचना गैबैंपवि.(नीति प्रभा.) एमजीसी. सं. 3 /मुमप्र (पीके)-2008, 15 फरवरी 2008

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-ठ (1)(ख) के अंतर्गत
बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के पंजीकरण एवं परिचालनों के संबंध में मार्गदर्शी सिद्धांत

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934(1934 का 2) की धारा 45-झ(च)(iii) के अनुसार जारी 15 जनवरी 2008 की अधिसूचना सं. गैबैंपवि.(एमजीसी.) सं. 1/मुमप्र (पीके)-2008 के अनुसार एवं इस बात से संतुष्ट होने पर कि ऐसा करना आवश्यक है उक्त अधिनियम (1934 का 2) की धारा 45-ठ (1) (ख) द्वारा प्रदत्त शक्तियों एवं इस संबंध में उसे समर्थ बनाने वाली समस्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक एतद द्वारा ये मार्गदर्शी सिद्धांत, इसमें यथा परिभाषित, बंधक (मार्गेज) गारंटी कारोबार करने वाली प्रत्येक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के अनुपालन के लिए जारी करता है:

1. संक्षिप्त नाम, निदेशों का प्रारंभ और उनकी प्रयोज्यता

  1. इन मार्गदर्शी सिद्धांतों को "बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी (रिज़र्व बैंक) मार्गदर्शी सिद्धांत, 2008" के नाम से जाना जाएगा।

  2. ये निदेश तत्काल प्रभाव से लागू हेंगे।

विस्तार/व्याप्ति

  1. ये मार्गदर्शी सिद्धांत बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनियों के भारत में पंजीयन एवं परिचालनों के लिए संरचना (फ्रेमवर्क) उपलब्ध कराते हैं।

परिभाषाएं

2. (1) इन मार्गदर्शी सिद्धांतों में जब तक विषय के संबंध में अन्यथा अपेक्षित न हो,

(ए) "बैंक" का अर्थ है-

  1. कोई बैंकिंग कंपनी; या

  2. प्रतिनिधि (corresponding) नया बैंक; या

  3. भारतीय स्टेट बैंक; या

  4. सहायक बैंक; या

  5. ऐसा कोई बैंक जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक अधिसूचना द्वारा इन मार्गदर्शी सिद्धांतों के लिए विनिर्दिष्ट करे; और

  6. बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) में यथा परिभाषित कोई सहकारी बैंक;

(बी) "बैंकिंग कंपनी" का अर्थ बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5(ग) में यथा परिभाषित किसी बैंकिंग कंपनी से है;

(सी) "उधारकर्ता" का अर्थ किसी व्यक्ति या किसी अन्य संस्था से है जिसे किसी ऋणदाता संस्था या किसी अन्य संस्था जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक, समय-समय पर, विनिर्दिष्ट करे, ने आवास/गृह ऋण दिया है;

(डी) "ऋणदाता संस्था" का अर्थ है कोई बैंक या आवास वित्त कंपनी;

(ई) "कंपनी" का अर्थ है कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 3 के अंतर्गत पंजीकृत कंपनी से;

(एफ) "प्रतिनिधि (corresponding) नये बैंक" का अर्थ है बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5 के खंड (घक) में यथा परिभाषित "प्रतिनिधि (corresponding) नये बैंक से";

(जी) "चूक" का अर्थ किसी उधारकर्ता द्वारा किसी ऋणदाता संस्था को मूल ऋण एवं उस पर देय ब्याज को अदा करने की तारीख पर अदा न करना है;

(एच) "गारंटी" का अर्थ गारंटी संविदा से है जैसाकि भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (1872 का 9) में परिभाषित है;

(आई) "आवास वित्त कंपनी" का अर्थ ऐसी कंपनी से है जिसका प्राथमिक संव्यवहार या प्रधान लक्ष्य आवास के लिए वित्त उपलब्ध कराने का करोबार है जैसाकि राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 में परिभाषित है;

(जे) "आवास ऋण" का अर्थ किसी व्यक्ति या किसी अन्य संस्था को दिया गया वह ऋण या अग्रिम है जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा, समय-समय पर, गृह या आवासीय संपत्ति के निर्माण/मरम्मत/उच्चीकरण या गृह (आवास) /आवास संपत्ति के अर्जन या दोनो अर्थात गृह(आवास) /आवास संपत्ति के अर्जन के लिए विनिर्दिष्ट किया जाता है;

स्पष्टीकरण: "आवास ऋण" की उल्लिखित परिभाषा में "अन्य संस्था" अभिव्यक्ति में शामिल हैं आवास समितियाँ तथा आवास सहकारिताएं(क्वापरेटिव्स) ।

(के) "बंधक (मार्गेज) गारंटी" का अर्थ किसी बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा दी गई वह गारंटी है जिसमें बकाया आवास ऋण तथा उस पर उपचित ब्याज की अदायगी ऋणदाता संस्था को गारंटीकृत सीमा के अधीन, ट्रिगर घटना होने पर, अदा की जानी है;

(एल) "बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी" का अर्थ उस कंपनी से है जिसका प्राथमिक संव्यवहार बंधक (मार्गेज) गारंटी देना है;

(एम) "बंधक (मार्गेज) गारंटी संविदा" का अर्थ उस त्रिपक्षीय संविदा से है जो उधारकर्ता, ऋणदाता संस्था तथा बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के बीच होता है जो बंधक (मार्गेज) गारंटी उपलब्ध कराती है;

(एन) "राष्ट्रीय आवास बैंक" का अर्थ राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय आवास बैंक से है;

(ओ) "निवल स्वाधिकृत निधि" वह है जिसे बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के लिए विवेकपूर्ण मानदण्डों में अधिसूचित किया गया है;

(पी) "अनर्जक परिसंपत्तियों" का अर्थ उधारकर्ता के उस खाते से है जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक या राष्ट्रीय आवास बैंक, जैसा भी मामला हो, द्वारा परिसंपत्तियों के वर्गीकरण के संबध में जारी निदेशों या मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुसार ऋणदाता संस्था ने अवमानक, संदिग्ध या हानिवाली परिसंपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया है;

(क्यू) "रिज़र्व बैंक" का अर्थ भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अंतर्गत गठित भारतीय रिज़र्व बैंक से है;

(आर) "पर्याप्त हित" का अर्थ है किसी व्यक्ति अथवा उसके पति-पत्नी अथवा अवयस्क बच्चे द्वारा एकल या सामूहिक रूप से किसी कंपनी के शेयरों में लाभभोगी हित धारिता, जिस पर अदा की गई रकम कंपनी की चुकता (प्रदत्त) पूंजी अथवा भागीदारी फर्म के सभी भागीदारों द्वारा अभिदत्त पूंजी के दस प्रतिशत से अधिक है;

(एस) "ट्रिगर इवेंट" का अर्थ है ऋणदाता संस्था की बहियों में उधारकर्ता के खाते का अनर्जक परिसंपत्ति के रूप मे वर्गीकृत होना;

(टी) "पण्यावर्त या व्यवसायगत पण्यावर्त" का अर्थ है एक वर्ष में की गई कुल बंधक (मार्गेज) गारंटी संविदाओं के साथ-साथ उस वर्ष में अन्य कार्यों/गतिविधियों (विशेषकर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमत) से व्युत्पन्न कारोबार का योग;

2. (2) इसमें प्रयुक्त अन्य शब्द अथवा अभिव्यक्तियाँ, किन्तु जो यहां परिभाषित नहीं हैं और कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) अथवा भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान द्वारा जारी लेखा मानकों में परिभाषित की गई है, का वही अर्थ होगा जो उक्त अधिनियम अथवा उक्त लेखा मानकों में है।

भारतीय रिज़र्व बैंक के पास पंजीकरण

3. बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी निम्नलिखित अपेक्षाएं पूरी करने के बाद बंधक (मार्गेज) गारंटी देने का कारोबार प्रारंभ करेगी :-

(ए) भारतीय रिज़र्व बैंक से पंजीकरण प्रमाणपत्र लेने पर; और

(बी) 100 करोड़ रुपए या भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एतदर्थ अधिसूचना द्वारा विनिदिष्ट अन्य उच्च राशि की निवल स्वाधिकृत निधियाँ होने पर।

4. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा इस प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट फार्म में प्रत्येक बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी पंजीकरण प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करेगी।

5. पंजीकरण प्रमाणपत्र के लिए प्रस्तुत आवेदन पत्र पर विचार करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक निम्नलिखित शर्तों की पूर्ति के संबंध में संतुष्ट होना चाहेगा:

(ए) कि बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी प्राथमिक तौर पर / मूलत: बंधक (मार्गेज) गारंटी देने का कारोबार करेगी। बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के संबंध में समझा जाएगा कि वह उल्लिखित अपेक्षा को पूरी कर रही है यदि उसके कारोबार के पण्यावर्त (टर्नओवर) का न्यूनतम 90% बंधक (मार्गेज) गारंटी से हुआ पण्यावर्त हो या उसकी संपूर्ण आय में से न्यूनतम 90% आय बंधक (मार्गेज) गारंटी कारोबार से हुई हो [इसमें बंधक (मार्गेज) गारंटी कारोबार से हुई आय के पुनर्निवेश से हुई आय शामिल है] ;

(बी) कि बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी अपने द्वारा की गई गारंटी संविदाओं से उत्पन्न/उत्पन्न होने वाली देयताओं का भुगतान करने में सक्षम है/ हो सकेगी;

(सी) कि निम्नलिखित पैराग्राफ 11 से 13 में विनिर्दिष्ट पर्याप्त पूंजीगत ढांचा बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के पास है और बंधक (मार्गेज) गारंटी कारोबार से पर्याप्त आय के आसार(प्रत्याशा) हैं;

(डी) कि बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के मौजूदा प्रबंधन या प्रस्तावित प्रबंधन का समान्य चरित्र/स्वरूप जनहित के प्रतिकूल नहीं है;

(ई) कि ऐसी बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के निदेशक बोर्ड के कुल निदेशकों में से आधे से ज्यादा निदेशक ऐसे नहीं हैं जो पर्याप्त हितधारक किसी शेयर धारक के नामिनी हों या पर्याप्त हितधारक शेयरधारक से किसी प्रकार संबद्ध हों या पर्याप्त हितधारक किसी शेयर धारक, यदि वह कोई कंपनी हो, की/के सहायक हो;

(एफ) (i) बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी की शेयर धारिता अच्छी तरह विविधीकृत होगी;

(ii) बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी किसी अन्य कंपनी की सहायक कंपनी नहीं होगी जिसमें वह कंपनी शामिल है जिसका पंजीकरण या गठन भारत से बाहर लागू विधि के अंतर्गत हुआ हो;

(iii) किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के असोसिएशन या निकाय चाहे वह गठित (इन्कार्पोरेटेड) हो या न हो, फर्म, कंपनी या वह कंपनी जिसका पंजीकरण या गठन भारत से बाहर लागू किसी विधि के अंतर्गत हुआ हो, के बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर नियंत्रक हित नहीं होंगे;

(जी) किसी बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी की ईक्विटी में निवेश की अर्हता के लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को विदेशी निवेश संवंर्धन बोर्ड का पूर्वानुमोदन होना चाहिए। बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी में पर्याप्त हित रखने वाली विदेशी संस्था, जिसे विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड/विदेशी मुद्रा विभाग का अनुमोदन मिला है, को गृह देश के वित्तीय विनियामक द्वारा विनियमित होना चाहिए और उसे स्वयं वरीयत: बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी होना चाहिए और उसका बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के रूप में परिचालन/कार्य करने का अच्छा ट्रैक रिकार्ड होना चाहिए। तथापि, उक्त शर्तें लागू नहीं होंगी, यदि बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी की ईक्विटी में निवेशक कोई अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था हो;

(एच) कि बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी को भारत में कारोबार प्रारंभ करने/जारी रखने के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान करने से जनता का हित होगा;

(आई) कि पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान करना देश के आवास वित्त क्षेत्र के परिचालन और प्रगति के लिए प्रतिकूल असरदायी नहीं होगा;

(जे) कि बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी इन कंपनियों पर लागू विदेशी निवेश मानदण्डों को अनुपालित करती है;

(के) कि भारतीय रिज़र्व बैंक की राय में, बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के भारत में कारोबार प्रारंभ करने या जारी रखने के संबंध में उस पर, शर्त लगाया जाना आवश्यक है ताकि उसके पूरी होने से यह सुनिश्चित हो सके कि भारत में उससे जनहित और आवास वित्त क्षेत्र पर प्रतिकूल असर न पड़े।

6. भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट होने पर कि उल्लिखित पैराग्राफ 5 के उप पैराग्रफों में विनिर्दिष्ट शर्तें पूरी हो गई हैं, उन शर्तों के साथ जिन्हें वह लगाना उचित समझे, पंजीकरण पत्र जारी कर सकता है ।

7. बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी भारतीय रिज़र्व बैंक के विनियामक और पर्यवेक्षी अधिकार-क्षेत्र में होंगी।

8. बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी को प्रदान किये गये पंजीकरण प्रमाणपत्र को भारतीय रिज़र्व बैंक रद्द कर सकता है यदि ऐसी कंपनी:-

(ए) बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी का कारोबार करना भारत में बंद कर देती है; या

(बी) जिन शर्तों के तहत उसे पंजीकरण प्रमाणपत्र दिया गया है, उनमें से किसी शर्त के पालन करने में विफल रहे; या

(सी) वह की गई /की जाने वाली गारंटी संविदाओं से उत्पन्न दावों का समय से निपटान/भुगतान करने में विफल हो; या

(डी) पैराग्राफ 5 तथा 6 में दी गई शर्तों में से कोई भी शर्त किसी भी समय पूरी करने में असफल हो; या

(ई) निम्नलिखित के संबंध में विफल होने पर-

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किसी भी निदेश का अनुपालन करने में; या

  2. किसी विधि या भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किसी निदेश या आदेश की अपेक्षाओं के अनुसार कंपनी अपनी वित्तीय स्थिति संबंधी लेखे रखने(मेनटेन करने), प्रकाशित करने तथा प्रकट करने में; या

  3. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा मांगे जाने पर निरीक्षण के लिए लेखा बहियों या अन्य संबंधित दस्तावेज़ों को प्रस्तुत करने में।

बंधक (मार्गेज) गारंटी की आवश्यक विशेषताएं

9. बंधक (मार्गेज) गारंटी संविदा की आवश्यक विशेषताएं इस प्रकार होंगी:

(ए) भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 126 के अंतर्गत यह एक गारंटी संविदा होगी;

(बी) भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अंतर्गत बंधक (मार्गेज) गारंटी संविदा बिना शर्त तथा अप्रत्याहूत होगी और प्राप्त गारंटी अवपीड़न, अवांछित प्रभाव, धोखाधड़ी, दुर्प्रतिनिधित्व, और/ या त्रुटि विहीन होगी;

(सी) इसमें उधारकर्ता के आवास खातेगत बकाया ऋण और ब्याज गारंटीकृत राशि तक अदा करने की गारंटी होगी;

(डी) गारंटीदाता आहूत किए/मांगे जाने पर बंधक संपत्ति के वसूल करने योग्य मूल्य से समायोजन के बिना गारंटीकृत राशि अदा करेगा;

(ई) यह त्रिपक्षीय करार उधारकर्ता, ऋणदाता संस्था और गारंटी देनेवाली कंपनी अर्थात गारंटीदाता कंपनी के बीच होगा।

10. बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी बीमा कारोबार नहीं करेगी।

न्यूनतम पूंजी अपेक्षा

11. कारोबार प्रारंभ करने के समय बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी के पास न्यूनतम 100 करोड़ रुपए की निवल स्वाधिकृत निधियाँ होनी चाहिए जिन्हें बढ़ाने की समीक्षा 3 वर्ष के बाद की जाएगी।

पूंजी पर्याप्तता

12. बंधक(मार्गेज) गारंटी कंपनी अपनी तुलनपत्रगत सकल जोखिम भारित परिसंपत्तियों और तुलन पत्रेतर मदों के जोखिम समायोजित मूल्य के दस प्रतिशत(10%) या भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा इस संबंध में समय-समय पर विनिर्दिष्ट प्रतिशत तक पूंजी पर्याप्तता अनुपात बनाए रखेगी।

13. बंधक(मार्गेज) गारंटी कंपनी अपनी तुलनपत्रगत सकल जोखिम भारित परिसंपत्तियों और तुलन पत्रेतर मदों के जोखिम समायोजित मूल्य का छह प्रतिशत(6%) टियर-1 पूंजी के रूप में बनाए रखेगी।

विवेकपूर्ण तथा लेखा मानदंड

14. बंधक(मार्गेज) गारंटी कंपनी को भारतीय रिजंर्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी विभिन्न विवेकपूर्ण मानदण्डों संबंधी मार्गदर्शी सिद्धांतो, जिनमें आय निर्धारण, परिसंपत्तियों के वर्गीकरण, प्रावधानीकरण, निवेशों के वर्गीकरण तथा मूल्यन और विवेकपूर्ण जोखिम मानदण्ड शामिल हैं, का अनुपालन करना होगा।

15. बंधक(मार्गेज) गारंटी कंपनी को भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान द्वारा समय-समय पर जारी सभी संबंधित लेखा-मानकों तथा मार्गदर्शी नोट्स (Guidance Notes) का पालन भी करना होगा।

16. कोई भी एकल/एक गारंटी, कंपनी की टियर-I तथा टियर-II पूंजी के 10% से अधिक नहीं होगी।

निधीयन विकल्प

17. (1) जनता से जमाराशियाँ स्वीकार करना: बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनियाँ जनता से जमाराशियाँ स्वीकार नहीं करेंगी।

17. (2) वाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB): बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनियाँ वाह्य वाणिज्यिक उधार नहीं लेंगी।

प्रारक्षित निधियों का सृजन और रखरखाव (मेनटेन करना)

आकस्मिकता प्रारक्षित (रिज़र्व) निधि

18. बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी सतत आधार पर "आकस्मिकता प्रारक्षित निधि" का सृजन करेगी और उसे बनाए रखेगी।

बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी:

(ए) लेखा-वर्ष के दौरान अर्जित प्रीमियम या फीस का न्यूनतम चालीस प्रतिशत (40%) या लाभ का (प्रावधान करने और टैक्स के बाद) पच्चीस प्रतिशत (25%), जो भी अधिक हो, आकस्मिकता प्रारक्षित निधि में प्रति वर्ष विनियोजित करेगी;

(बी) अपर्याप्त लाभ होने की दशा में ऐसे विनियोजन का परिणाम हानि हो सकता है अथवा अग्रेषित हानि की राशि बढ़ जाएगी;

(सी) यदि किसी लेखा वर्ष में बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा गारंटी दावों के भुगतान, वर्ष के दौरान अर्जित प्रीमियम या फीस के पैंतीस प्रतिशत (35%) से अधिक हो जाएं, तो उस वर्ष बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी आकस्मिकता प्रारक्षित निधि में कम (प्रतिशत में) प्रावधान कर सकती है;

(डी) यह सुनिशचित करेगी कि आकस्मिकता प्रारक्षित निधि उसकी कुल बाकाया बंधक गारंटी वायदों के न्यूनतम पांच प्रतिशत (5%) तक सृजित हो जाए;

(ई) प्रत्येक वर्ष आकस्मिकता प्रारक्षित निधि में विनियोजित राशि को आगामी न्यूनतम 7 वर्ष तक रखे रहेगी जिसे केवल आठवें वर्ष में प्रति रूपांतरित (रिवर्स) किया जा सकेगा बशर्ते मद सं. 18(घ) की अपेक्षाएं पूर्ण हों;

(एफ) आकस्मिकता प्रारक्षित निधि का उपयोग भारतीय रिज़र्व बैंक की पूर्वानुमति/मंजूरी से ही करेगी;

(जी) तुलन पत्र के देयता भाग की ओर अलग से पंक्ति में आकस्मिकता प्रारक्षित निधि की राशि को दिखाएगी; तथापि, आकस्मिकता प्रारक्षित निधि को निवल स्वाधिकृत निधियों के प्रयोजन से "मुक्त प्रारक्षित निधि" के रूप में माना जाएगा।

अनर्जित प्रीमियम का लेखाकरण

19. बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान द्वारा जारी लेखा मानकों के अनुसार बंधक संविदाओं पर ली गई प्रीमियम या फीस की गणना आय के रूप में अपने लाभ-हानि खाते में करेगी। अनर्जित प्रीमियम तुलनपत्र की देयता वाले भाग में अलग पंक्ति में दर्शाया जाएगा।

आहूत गारंटियों से हुई हानि के लिए प्रावधान

20. जब बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा दी गई गारंटी आहूत की जाती है ते उसे संभावित हानि का जोखिम होता है। बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी को इस प्रकार आहूत की गई गारंटियों से होने वाली हानि के मद्देनज़र, परिसंपत्तियों की वसूली होने तक, प्रावधान रखना चाहिए। इस प्रकार रखे जाने वाले प्रावधान की राशि प्रत्येक आवास ऋण के संबंध में सकल गारंटी संविदावार राशि, जिसके संबंध में गारंटी आहूत हुई हो, के बाबत कंपनी के अधिकार में आयी परिसंपत्तियों से वसूलनीय मूल्य को समायोजित करके शेष रही राशि के बराबर होनी चाहिए। यदि किसी आहूत गारंटी के संबंध में रखी परिसंपत्ति से वसूलनीय राशि आहूत राशि से ज्यादा होती है तो उसे किसी अन्य आहूत गारंटी के मामले में घटने वाली /कम होने वाली राशि के प्रति समायोजित नहीं किया जा सकेगा। यदि पहले से किया गया प्रावधान उल्लेखानुसार गणना किये जाने पर बेशी होता है तो बढ़ी हुई राशि के प्रावधान को उलटा(रिवर्स) नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक वर्ष किए गए प्रावधान को लाभ-हानि खाते में अलग पंक्ति में दर्शाया जाएगा। आहूत गारंटियों के संबंध में भुगतान/निपटान से हुई हानि के लिए किए गए प्रावधान की राशि तुलनपत्र के देयता वाले भाग में अलग पंक्ति में दर्शायी जाएगी।

" हानि जो हुई किन्तु रिपोर्ट नहीं की गई के लिए प्रावधान(IBNR)

21. बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा गारंटीकृत आवास ऋण के संबंध में की गई चूक से गारंटीदाता कंपनी को संभावित जोखिम हो सकता है। आवास ऋण संबंधी चूक के ऐसे मामले, जिनमें ट्रिगर घटना/इवेंट होनी है या गारंटी आहूत नहीं हुई है के बाबत बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा प्रावधान किया जाएगा। वह संभावित हानि जो गारंटी कंपनी को हो सकती है को "हानि जो हुई किन्तु रिपोर्ट नहीं की गई" कहा गया है। किए जाने वाले अपेक्षित प्रावधान की राशि बीमा करने के आधार पर निकाली जाएगी जो "हुई किन्तु रिपोर्ट न की गई हानि" की आवृत्ति/बारंबारता तथा हानि के असर/की कठोरता के अनुमान पर आधारित होगी। इन्हें ऐतिहासिक (historic) आंकड़ों, प्रवृत्तियों, आर्थिक कारकें एवं भुगतान किए / निपटाए गए दावों, भुगतान किए/निपटाए गए दावों के लिए किए गए प्रावधानों, जोखिम सांख्यिकी से संबंधित अन्य सांख्यिकीय आंकड़ों आदि के आधार पर आकलित किया जाएगा। यदि पहले से किया गया प्रावधान उल्लेखानुसार गणना किये जाने पर अधिक होता है तो बढ़ी हुई राशि के प्रावधान को उलटा(रिवर्स) नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक वर्ष किए गए प्रावधान को लाभ-हानि खाते में अलग पंक्ति में दर्शाया जाएगा। "हुई किन्तु रिपोर्ट न की गई हानि" के लिए किए गए प्रावधान की राशि तुलनपत्र के देयता वाले भाग में अलग पंक्ति में दर्शायी जाएगी।

गारंटियों को दर्ज करने के लिए रजिस्टर रखना

22. बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी दी गई गारंटियों के ब्योरों को दर्ज करने के लिए एक या कई रजिस्टर रखेगी, जैसे-

(ए) उधारकर्ता/सह उधारकर्ता का नाम और पता

(बी) उधारकर्ता को मंजूर ऋण की तारीख और राशि

(सी) संपत्ति का संक्षिप्त ब्योरा, संपत्ति के स्थान/अवस्थिति (लोकेशन) की जानकारी सहित

(डी) ऋण के लिए उपलब्ध प्रतिभूति/सिक्युरिटी का स्वरूप

(ई) ऋण (के अदा होने की) अवधि

(एफ) प्रत्येक किस्त कितनी राशि की है तथा हरेक किस्त के अदा होने की तारीखें

(जी) उस बैंक या आवास वित्त कंपनी का नाम और पता जिसे गारंटी उपलब्ध कराई गई है

(एच) गारंटी की तारीख और राशि और

(आई) गारंटी की अवधि/की कालावधि।

23. बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी का दायित्व किसी ऋणदाता संस्था द्वारा जमानती(सिक्योर्ड) आवास ऋण/गृह ऋण के संबंध में बंधक गारंटीदाता कंपनी, ऋणदाता संस्था तथा उधारकर्ता के बीच हुई गारंटी संविदा में किए गए विनिर्देशन के अनुसार होगी।

24. ट्रिगर घटना (इवेंट) के बाद किसी भी दिन ऋणदाता संस्था ने जिस बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी से गारंटी प्राप्त की है, वह उस बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी से गारंटी आहूत करने की हकदार हो जाएगी।

25. जब भी बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी को उसके द्वारा दी गई गारंटी के संबंध में उस बैंक या आवास वित्त संस्था से मांग की नोटिस आए जिसने गारंटी प्राप्त की है, तो गारंटीदाता कंपनी बिना विलंब(demur) के गारंटी दायित्व का भुगतान करेगी।

26. आवास ऋण/गृह ऋण के अनजर्क परिसंपत्ति में तब्दील होने पर यदि ऋणदाता संस्था वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण तथा पुनर्संरचना और प्रतिभूति हित(ब्याज) प्रवर्तन अधिनियम, 2002(SARFAESI Act, 2002) में विनिर्दिष्ट त्वरित गति से वसूली की प्रक्रिया का रास्ता अख्तियार कर ऋण की वसूली करने को प्रथम वरीयता दे तथा ऋणदाता संस्था ऋण में से कुछ राशि वसूल कर ले तो बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी की देयता में से इस प्रकार वसूल की गई राशि को ऋण राशि से घटा दिया जाएगा।

27. जैसा कि वाणिज्यिक बैंकों से उनके आवास/गृह ऋण के लिए बंधक (मार्गेज) गारंटी की अपेक्षा की जाती है, अत: वाणिज्यिक बैंक की तरह बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनियों के लिए एलटीवी अनुपात को विनियामक निर्धारण में शामिल करने का निर्णय लिया गया है तथा रू 20 लाख से अधिक के गृह/आवास ऋण के लिए इसे संशोधित कर 90% से 80% घटा दिया गया है. तथापि छोटे मूल्य के गृह/आवास ऋण जैसे रू 20 लाख तक का गृह/आवास ऋण (जिसे प्राथमिक क्षेत्र के अग्रिम में श्रेणीबद्ध किया गया है) के लिए एलटीवी अनुपात 90% से अधिक नहीं हों।1

बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा समुचित सावधानी बरतना/डियु डिलीजेंस करना

28. आवास ऋण/गृह ऋण के संबंध में गारंटी का प्रस्ताव करने से पूर्व बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी से अपेक्षित है कि वह, अन्य बातों के साथ-साथ, निम्नलिखित के संबंध में अपनी संतुष्टि कर ले:

(ए) कि ऋण वैध बंधक (मार्गेज) से सुरक्षित है;

(बी) कि ऋणदाता संस्था ने संपत्ति के हक/स्वत्व, संपत्ति की विक्रेयता तथा उधारकर्ता की ऋण-शोधन-क्षमता का सत्यापन कर लिया है;

(सी) कि ऋणदाता संस्था ने उस भूमि के उपयोग का सत्यापन कर लिया है, जिस पर लिए गए ऋण से आवास या आवासीय संपत्ति/गृह निर्माण हुआ है /करने का प्रस्ताव है;

(डी) कि आवास/आवासीय संपत्ति के निर्माण या प्रस्तावित निर्माण के संबंध में समुचित प्राधिकारियों से उधारकर्ता द्वारा ली गई मंजूरी/अनुमति की प्रतिलिपि ऋणदाता संस्था द्वारा ली गई है और उसे सत्यापित किया गया है; तथा

(ई) कि संपत्ति के मूल्य के 90% से ज्यादा ऋण ऋणदाता संस्था द्वारा उधारकर्ता को नहीं दिया गया है।

निषेध/रोक

29. (1) ऐसे ऋण से अधिग्रहीत या अधिग्रहीत करने के लिए प्रस्तावित आवास(गृह)/ आवासीय संपत्ति को वैध बंधक रखकर सुरक्षित न किये गये आवास ऋण बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा गारंटी दिए जाने के पात्र नहीं होंगे।

कमीशन, छूट/रियायत या प्रोत्साहन देना

29. (2) मार्गेज गारंटी कंपनी मार्गेज गारंटी कारोबार को संदर्भित करने/अपने पास लाने के लिए किसी भी व्यक्ति को कमीशन, रियायत या अन्य प्रोत्साहन(प्रलोभन) नहीं देगी।

मार्गेज प्रारंभ करने वाली संबंधित पार्टियों को गारंटी देने पर रोक

29. (3) प्रवर्तकों, उनकी अनुषंगी, सहयोगी कंपनियों और संबंधित पाटिर्यों या अनुषंगी, सहयोगी कंपनियों या मार्गेज कंपनी से संबंधित पार्टियों जिनमें वे कंपनियाँ शामिल हैं द्वारा प्रारंभ किए गए मार्गेज तथा वह कंपनी जिनमें मार्गेज कंपनी ने महत्त्वपूर्ण निवेश किया है या जिनमें उनकी शेयरधारिता(होल्डिंग) पांच प्रतिशत(5%) या अधिक है, को मार्गेज गारंटी कंपनी गारंटी नहीं देगी।

निवेश

29. (4) मार्गेज गारंटी कंपनी नोट्स या ऋणग्रस्तता के अन्य साक्ष्यों/प्रमाणों, जिसे/जिन्हें किसी मार्गेज या स्थावर संपत्ति पर अन्य ग्रहणाधिकार द्वारा प्रतिभूत किया गया हो, में निवेश नहीं करेगी। यह धारा उन मामलों में लागू नहीं होगी जहाँ स्थावर संपदा द्वारा प्राप्त उत्तरदायित्वों, या स्थावर संपदा की बिक्री संबंधी संविदा, जो बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा जारी नीतियों के तहत दावों के सद्भावपूर्ण भुगतान/निपटान के दौरान मिले बिक्रीगत उत्तरदायित्वों या संविदा से प्राप्त हुए हों या इस प्रकार अधिग्रहीत संपदा के सद्भावपूर्ण अधिकार के तहत आए हों।

लेखापरीक्षा समिति का गठन

30. मार्गेज गारंटी कंपनी एक लेखापरीक्षा समिति का गठन करेगी जिसमें कंपनी के बोर्ड के कम से कम तीन गैर कार्यपालक निदेशक शामिल किए जाएंगे और उनमें से कम से कम एक सनदी लेखाकार होगा।

गारंटी प्रदान करने के लिए नीति

31.मार्गेज गारंटी कंपनी का निदेशक बोर्ड ऋणदाता संस्थाओं को मार्गेज गारंटी देने के लिए कंपनी की नीति निर्धारित करेगा। ऐसी नीति में, अन्य बातों के साथ-साथ, आगे लिखित बातों का भी निर्धारण होगा:-

(ए) बंधक (मार्गेज) गारंटी प्रदान करने के लिए ली जाने वाली फीस या प्रीमियम का निर्धारण कतिपय मानकों के आधार पर किया जाए जिनमें शामिल होंगे ऋण की मात्रा (राशि), एलटीवी अनुपात, उधारकर्ता की ऋण-शोधन-क्षमता (साख) गुणवत्ता, और बैंक या आवास वित्त कंपनी का ऋण-मूल्यांकन/क्रेडिट जोखिम प्रबंधन का कौशल,

(बी) बंधक (मार्गेज) गारंटी प्रदान करने एवं गारंटी संविदा निष्पादित करने के लिए अधिकारों का प्रत्यायोजन,

(सी) बैंकों तथा आवास वित्त कंपनियों से प्राप्त दावों के सद्भावपूर्ण भुगतान के लिए निर्णय लेने हेतु अधिकारों का प्रत्यायोजन, और

(डी) उधारकर्ताओं से प्राप्य राशि की वसूली के लिए कार्रवाई प्रारंभ करने के लिए अधिकारों का प्रत्यायोजन।

बंधक (मार्गेज) गारंटी - योजना

32.बंधक (मार्गेज) गारंटी प्रदान करने के प्रयोजन से बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनियाँ विस्तृत योजना तैयार करेंगी जिसे उनके निदेशक बोर्ड द्वारा विधिवत अनुमोदित किया जाएगा। योजना में, अन्य बातों के साथ-साथ, निम्नलिखित मामले होंगे:-

(ए) आवास/गृह ऋण की गुणवत्ता,

(बी) किसी बैंक या आवास वित्त कंपनी द्वारा किसी उधारकर्ता को प्रदान किए गए आवास/गृह ऋण के अधिकतम कितने अंश को गारंटी संविदा में शामिल किया जाएगा,

(सी) गारंटी संविदा में शामिल किए जाने वाले आवास /गृह ऋण के एलटीवी अनुपात की न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा,

(डी) किसी उधारकर्ता द्वारा बंधक (मार्गेज) गारंटी हेतु बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी को अदा की जाने वाली फीस या प्रीमियम या शुल्क एवं उसके अदा करने के तरीके का उल्लेख किया जाए,

(ई) बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी की देयता क्या उधारकर्ता के साथ या अन्यथा सह प्रभावी (co-extensive) होगी, और

(एफ) गारंटी आहूत किए जाने और बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा उसकी अदायगी बैंक या आवास वित्त कंपनी को किये जाने पर बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी या बैंक या आवास वित्त कंपनी की कौन सी पार्टी द्वारा उधारकर्ता से ऋण की वसूली की जाएगी संबंधी शर्त।

प्रति गारंटी

33.जब भी कोई बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी अपने द्वारा आवास ऋण पर दी गई गारंटी के संबंध में किसी अन्य बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी से प्रति गारंटी प्राप्त करे, तब बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी और प्रति गारंटी दाता कंपनी भारत में बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी द्वारा रखे जाने के लिए अपेक्षित प्रारक्षित निधियाँ उस अनुपात में बनाए रखेंगी जिस अनुपात में मूल गारंटी दाता कंपनी का तथा प्रति गारंटी लेने वाली कंपनी का जोखिम हो जाता है ताकि उनके द्वारा रखे गए कुल रिज़र्व भारतीय विधि के तहत किसी बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी से अपेक्षित रिज़र्व से कम न हों। यदि प्रति गारंटी दाता कंपनी भारत में विनियमित न होती हो तो गारंटीदाता बंधक (मार्गेज) गारंटी कंपनी दावों के संबंध में उसके द्वारा जारी बकाया सभी बंधक (मार्गेज) गारंटी संविदाओं के संबंध में तदनुरूपी प्रारक्षित निधियाँ एवं प्रावधान रखेगी।

छूट

34. भारतीय रिज़र्व बैंक, यह आवश्यक समझने पर कि किसी कठिनाई को दूर किया जा सके या किसी अन्य उचित और पर्याप्त कारण से, किसी मार्गेज गारंटी कंपनी या मार्गेज गारंटी कंपनियों की किसी श्रेणी या सभी मार्गेज गारंटी कंपनियों को इन मार्गदर्शी सिद्धांतों के सभी या किसी प्रावधान/शर्त/शर्तों से सामान्यत: या विनिर्दिष्ट अवधि तक, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा उन शर्तों के तहत जिन्हें वह लगाए, के अंतर्गत छूट दे सकता है।

35. इन मार्गदर्शी सिद्धांतों के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक स्पष्टीकरण दे सकेगा और दिए गए ऐसे स्पष्टीकरणों को इन मार्गदर्शी सिद्धांतों का भाग माना जाएगा। इन मार्गदर्शी सिद्धांतों को बैंक समय-समय पर संशोधित कर सकता है।


116 दिसम्बर 2011 का यथा परिपत्रसं सं गैबैंपवि(नीप्र-एमजीसी) कंपरि सं: 10/03.11.01/2011-12 शामिल किया गया।

 
 
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