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आय कर बेबाकी प्रमाणपत्र / अनापत्ति प्रमाणपत्र

ए.पी.(डीआइआर सिरीज़) परिपत्र सं. 27

28 सितंबर 2002

सेवा में
विदेशी मुद्रा के समस्त प्राधिकृत व्यापारी

महोदया/महोदय

आय कर बेबाकी प्रमाणपत्र / अनापत्ति प्रमाणपत्र

सभी प्राधिकृत व्यापारियों का ध्यान केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी 18 नवंबर 1997 की अधिसूचना एफ.सं. 500/152/96-एफआईडी की ओर आकृष्ट किया जाता है जिसके अनुसार कोई व्यक्ति विदेशी मुद्रा का विप्रेषण कर रहा है तो वह कर- निर्धारण प्राधिकारी को सम्बोधित दो प्रतियों में वचनपत्र प्रस्तुत करेगा। यह वचनपत्र आवेदक की आय कर विवरणी पर हस्ताक्षर करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए तथा लेखाकार से दो प्रतियों में प्रमाणत्र सहित उसे प्रस्तुत करना चाहिए।

2. तदनुसार, प्राधिकृत व्यापारियों को सूचित किया जाता है कि वे उपरोल्लिखित 18 नवंबर 1997 की अधिसूचना के अनुसार, संबंधित अधिसूचना तथा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के तहत जारी संबंधित परिपत्रों में निर्धारित किये अनुसार "आय कर बेबाकी प्रमाणपत्र " अथवा "अनापत्ति प्रमाणपत्र" के बदले में वचनपत्र स्वीकार करें तथा विदेशी मुद्रा के विप्रेषण की अनुमति दें।

3. यह स्पष्ट किया जाता है कि  अनिवासी भारतीयों/ भारतीय मूल के व्यक्तियों जिनका  अनिवासी सामान्य खाता नहीं है और भारत में कोई कर योग्य आय नहीं है, उनके मामले में  प्राधिकृत व्यापारी दिनांक 28 सितंबर 2002 के ए.पी. (डीआइआर सिरीज) परिपत्र सं.26 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनसे एक सरल घोषणा प्राप्त कर लेने के बाद विप्रेषण करने की अनुमति दें।

3. प्राधिकृत व्यापारी इस परिपत्र की विषय-वस्तु से अपने संबंधित घटकों को अवगत कराएं।

4. इस परिपत्र में समाहित निर्देश, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और 11 (1) के अधीन जारी किए गए हैं।

भवदीया

( ग्रेस कोशी )
मुख्य महाप्रबंधक

 
 
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