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विदेशी नागरिकों और विदेशी पर्यटकों द्वारा खोले गए खाते

(22 जून 2012 तक अद्यतन)

प्रश्न:1.क्या विदेशी पर्यटक भारत के संक्षिप्त दौरे की अवधि में बैंक खाता खोल सकते हैं?

उत्तर: हाँ। विदेशी पर्यटक भारत के संक्षिप्त दौरे की अवधि में, विदेशी मुद्रा का व्यापार करने वाले किसी प्राधिकृत व्यापारी बैंक में अनिवासी (साधारण) रुपया (एनआरओ) खाता  (चालू/बचत खाता) खोल सकते हैं। ऐसा खाता अधिकतम 6 माह की अवधि के लिए खोला जा सकता है।

प्रश्न:2. ऐसे खाते खोलने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?

उत्तर: ऐसे खाते खोलने के लिए पासपोर्ट और वैध पहचान साक्ष्यों की जरूरत होती है। प्राधिकृत व्यापारी बैंकों से अपेक्षित है कि वे ऐसे खाते खोलते समय "अपने ग्राहक को जानने" संबंधी मानदंडों का अनुपालन करें।

प्रश्न: 3. ऐसे खातों में क्या जमा किया जा सकता है?

उत्तर: भारत के बाहर से बैंकिंग चैनल से प्रेषित निधियां अथवा पर्यटक द्वारा भारत लाई गई विदेशी मुद्रा की बिक्री से प्राप्त निधियां ऐसे एनआरओ खाते में जमा की जा सकती हैं।

प्रश्न:4. क्या एनआरओ खाते का इस्तेमाल स्थानीय भुगतान करने के लिए किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ। पर्यटक मुक्त रूप से एनआरओ खाते से स्थानीय भुगतान कर सकते हैं। भारतीय निवासियों को `50,000/- से अधिक के भुगतान केवल चैक/भुगतान आदेश/ डिमांड ड्राफ्ट से (अदा) किए जा सकते हैं।

प्रश्न:5. क्या पर्यटक भारत से वापस जाते समय अपने एनआरओ खाते में जमा शेष रकम को वापस ले जा सकते हैं?

उत्तर: प्राधिकृत व्यापारी बैंकों को यह अनुमति दी गई है कि वे भारत से वापस जाते समय पर्यटकों के एनआरओ खाते में जमा शेष को विदेशी मुद्रा में परिवर्तित करके भुगतान कर दें, बशर्ते खाता छह माह से अधिक अवधि के लिए चालू रखा न रखा गया हो और जमा रकम पर अर्जित ब्याज के सिवाय उसमें कोई और स्थानीय रकम/निधियां जमा न की गई हों।

प्रश्न: 6. छह माह से अधिक अवधि तक चालू रखे गए खाते में जमा रकम को वापस ले जाने के लिए क्या करना चाहिए?

उत्तर: ऐसे मामलों में जिस प्राधिकृत व्यापारी बैंक के पास रखे गए खाते में रकम जमा हो उसके माध्यम से शेष रकम को वापस ले जाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के विदेशी मुद्रा विभाग को सादे कागज पर आवेदन करना चाहिए।

प्रश्न: 7. क्या भारत में निवास करने वाले विदेशी राष्ट्रिक निवासी खाते खोल सकते हैं?

उत्तर: हां। समय-समय पर यथा संशोधित 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा. 5/ 2000-आरबी अर्थात विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली,2000 के अनुसार भारत में निवास करने वाले विदेशी राष्ट्रिक भारत में निवासी खाते खोल एवं रख सकते हैं।

प्रश्न: 8. क्या प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी I बैंक ऐसे खातों के बंद करने पर उनमें शेष राशियां विप्रेषित (रेमिट) कर सकते हैं?

उत्तर: हां। किन्तु प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी I बैंक यह सुनिश्चित करें कि इस प्रकार भारत से बाहर विप्रेषित की जाने वाली निधियां या तो भारत के बाहर से आयी हों अथवा प्रत्यावर्तनीय स्वरूप की हों अथवा समय-समय पर यथासंशोधित 3 मई 2000 की अधिसूचना सं. फेमा. 13/2000-आरबी के अनुसार विप्रेषित किए जाने के लिए अनुमत हों। वैध वीज़ा धारक भारत में नियुक्त विदेशी राष्ट्रिक भारत में प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी -। बैंक के पास निवासी खाता खोलने के लिए पात्र हैं। ऐसे विदेशी राष्ट्रिकों को भारत में उनकी अनिर्णीत देय राशियां प्राप्त करना सुकर बनाने के लिए, प्राधिकृत व्यापारी  श्रेणी -। बैंक विदेशी राष्ट्रिकों को, भारत में रखे गए उनके निवासी खाते उनके नियोजन के बाद देश छोड़ने पर, अनिवासी (सामान्य) रुपया (एनआरओ)खाते के रूप में पुन: नामित करने की अनुमति दे सकते हैं, ताकि वे अपनी वास्तविक अनिर्णीत देय राशियां विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन प्राप्त कर सकें।

 
 
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