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उदारीकृत विप्रेषण योजना

(20 जनवरी 2012 तक अद्यतन)

भारतीय रिज़र्व बैंक ने निवासी व्यक्तियों के लिए उपलब्ध विदेशी मुद्रा संबंधी सुविधाओं को और सरल तथा उदार बनाने के अगले चरण के रूप में फरवरी 2004 में एक उदारीकृत विप्रेषण योजना (योजना) घोषित की। इस योजना के अनुसार, निवासी व्यक्ति अनुमत पूंजी तथा चालू खातेगत लेनदेनों अथवा दोनों के लिए संयुक्त रूप में प्रति वित्तीय वर्ष 200,000 अमरीकी डॉलर तक की राशि विप्रेषित कर सकते हैं। यह योजना 4 फरवरी 2004 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 64 के जरिये कार्यान्वित की गयी थी।

भाग ए:

प्रश्न 1. 200,000 अमरीकी डॉलर की उदारीकृत विप्रेषण योजना (योजना) क्या है?

उत्तर: उदारीकृत विप्रेषण योजना के तहत, अवयस्क सहित सभी निवासी व्यक्तियों को अनुमत चालू तथा पूंजी खाता लेनदेनों के लिए अथवा दोनों के लिये संयुक्त रूप में प्रति वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) 200,000 अमरीकी डॉलर तक की राशि मुक्त रूप से विप्रेषित करने के लिए अनुमति दी गयी है।

प्रश्न 2. कृपया इस योजना के तहत अनुमत पूंजी खाता लेनदेनों की एक निदर्शी सूची प्रस्तुत करें।

उत्तर: इस योजना के तहत, निवासी व्यक्ति भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना भारत से बाहर अचल संपत्ति अथवा शेयर अथवा कर्ज लिखत अथवा कोई अन्य परिसंपत्ति अर्जित तथा धारित (hold) कर सकते हैं। निवासी व्यक्ति इस योजना के तहत अनुमत लेनदेन करने के लिए भारत से बाहर के बैंकों के पास विदेशी मुद्रा खाते भी खोल सकते हैं, बनाये रख सकते हैं तथा धारित (hold) कर सकते हैं ।

प्रश्न 3. योजना के तहत प्रतिबंधित मदें कौन सी हैं?

उत्तर: इस योजना के तहत निम्नलिखित के लिए विप्रेषण की सुविधा उपलब्ध नहीं है:

i) विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) विनियमावली, 2000 की अनुसूची-। के तहत विशेष रूप से निषिद्ध किसी भी प्रयोजन (जैसे लॉटरी टिकट खरीदने/जुए में दांव लगाने, निषिद्ध पत्रिकाओं की खरीद, आदि) अथवा अनुसूची - ॥ के तहत प्रतिबंधित किसी भी मद के लिए विप्रेषण;

ii) विदेशी (ओवरसीज़) विनिमय गृहों/विदेशी (ओवरसीज़) काउंटर पार्टी को मार्जिन अथवा मार्जिन कॉल के लिए भारत से विप्रेषण;

iii) विदेशी (ओवरसीज़) द्वितीयक बाजार में भारतीय कंपनियों द्वारा जारी विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांडों की खरीद के लिए विप्रेषण;

iv) विदेश में विदेशी मुद्रा की ट्रेडिंग के लिए विप्रेषण;

v) किसी निवासी व्यक्ति द्वारा विदेश में कंपनी स्थापित करने के लिए विप्रेषण;

vi) भूटान, नेपाल, मॉरिशस और पाकिस्तान को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष विप्रेषण;

vii) वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (एफएटीएफ) द्वारा "गैर-सहयोगी देश और क्षेत्र'' के रूप में, समय- समय पर, अभिनिर्धारित देशों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से विप्रेषण; और

viii) रिज़र्व बैंक द्वारा बैंकों को अलग से यथासूचित उन व्यक्तियों और संस्थाओं, जिनकी पहचान आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न होकर भारी जोखिम खड़े करने वाले के रूप की गई है, को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से विप्रेषण।

प्रश्न 4. क्या उदारीकृत विप्रेषण योजना विप्रेषणों के तहत अनुसूची ।।। में विस्तृत रूप से दी गयी मौजूदा सुविधाओं के अतिरिक्त है?

उत्तर: हाँ, इस योजना के तहत सुविधा, विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) विनियमावली, 2000 की अनुसूची III में यथा-वर्णित निजी यात्रा, कारोबारी यात्रा, अध्ययन, चिकित्सा-इलाज आदि के लिए पहले से ही उपलब्ध सुविधा के अतिरिक्त है। इस योजना का उपयोग इन प्रयोजनों के लिए भी किया जा सकता है।

तथापि, उपहार तथा दान के लिए विप्रेषण अलग से नहीं किये जा सकते हैं और वे इस योजना के तहत ही किये जाने चाहिए। तदनुसार, निवासी व्यक्ति उपहार और दान के रूप में इस योजना के तहत प्रति वित्तीय वर्ष 200,000 अमरीकी डॉलर तक की राशि विप्रेषित कर सकते हैं।

इसके अलावा, निवासी व्यक्ति अपने अतिथि घनिष्ठ रिश्तेदार (कंपनी अधिनियम,1956 की धारा 6 में यथा परिभाषित रिश्तेदार) अनिवासी भारतीय/भारतीय मूल के व्यक्ति को (निवासी व्यक्ति के लिए) प्रति वित्तीय वर्ष 200,000 अमरीकी डॉलर की समग्र सीमा के भीतर रेखित (क्रास) चेक/ इलेक्ट्रानिक अंतरण के मार्फत रुपए उपहार में दे सकते हैं तथा ऐसे उपहार की राशि लाभार्थी के एनआरओ खाते में जमा की जाएगी। निवासी व्यक्ति, अपने घनिष्ठ रिश्तेदार (कंपनी अधिनियम,1956 की धारा 6 में यथा परिभाषित रिश्तेदार) अनिवासी भारतीय/भारतीय मूल के व्यक्ति को उदारीकृत विप्रेषण योजना के तहत प्रति वित्तीय वर्ष 200,000 अमरीकी डॉलर की समग्र सीमा के भीतर रेखित (क्रास) चेक/इलेक्ट्रानिक अंतरण के मार्फत भारत में उधारकर्ता की निजी अथवा कारोबारी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन राशि उधार दे सकता है। ऐसी उधार राशि ब्याज मुक्त होनी चाहिये, उसकी परिपक्वता अवधि न्यूनतम एक वर्ष होनी चाहिये तथा उसे भारत से बाहर विप्रेषित नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 5. क्या इस योजना के तहत निवासी व्यक्तियों को, मूल राशि के अतिरिक्त, विदेश में रखी जमाराशियों/किए गए निवेशों पर उपचित ब्याज/लाभांश को प्रत्यावर्तित करना आवश्यक है?

उत्तर: निवासी निवेशक व्यक्ति इस योजना के तहत किये गये निवेशों पर अर्जित आय को रोक रख सकते हैं और उसका पुन: निवेश कर सकते हैं। इस योजना के तहत किये गये निवेशों संबंधी निधियां अथवा उन पर अर्जित आय का प्रत्यावर्तन करना निवासियों के लिए आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 6. क्या इस योजना के तहत विप्रेषण सकल आधार पर अथवा निवल आधार (विदेश से निवल प्रत्यावर्तन को छोड़कर) पर होते हैं?

उत्तर: इस योजना के तहत विप्रेषण सकल आधार पर होते हैं।

प्रश्न 7. क्या इस सुविधा के तहत विप्रेषण परिवार के सदस्यों के संबंध में समेकित किये जा सकते हैं?

उत्तर: इस सुविधा के तहत विप्रेषण परिवार के सदस्यों के संबंध में समेकित किये जा सकते हैं बशर्ते परिवार का प्रत्येक सदस्य योजना की शर्ते पूर्ण करता हो।

प्रश्न 8. क्या कोई व्यक्ति योजना के तहत सीधे ही अथवा नीलामी गृह के जरिये कलात्मक वस्तुओं (पेंण्टिंग, आदि) की खरीद कर सकता है?

उत्तर: इस योजना के तहत विप्रेषणों का उपयोग कलात्मक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जा सकता है बशर्ते इस बाबत भारत सरकार की वर्तमान विदेश व्यापार नीति और अन्य लागू कानूनों का अनुपालन होता हो।

प्रश्न 9. क्या प्राधिकृत व्यापारी को लेनदेनों के स्वरूप पर आधारित विप्रेषणों की अनुमेयता की जाँच करना आवश्यक है अथवा विप्रेषक के घोषणापत्र के आधार पर उसे अनुमति दी जा सकती है?

उत्तर: विप्रेषक द्वारा की गई घोषणा के अनुसार लेनदेन के स्वरूप के बारे में प्राधिकृत व्यापारी अवगत होगा और वह प्रमाणित करेगा कि विप्रेषण रिज़र्व बैंक द्वारा, समय-समय पर, जारी अनुदेशों के अनुसार है।

प्रश्न 10. क्या कर्मचारी स्टाक विकल्प योजना के तहत अभिग्रहण के लिए इस योजना के अंतर्गत विप्रेषण किया जा सकता है?

उत्तर: कर्मचारी स्टाक विकल्प योजना (इएसओपीएस) के तहत अभिग्रहण के लिए निधियों के विप्रेषण हेतु इस योजना का उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 11. क्या यह योजना एडीआर/जीडीआर से संबद्ध कर्मचारी स्टाक विकल्प योजना (इएसओपीएस) के तहत अभिग्रहण के अतिरिक्त है (अर्थात् 5 कैलेण्डर वर्षों के लिए 50,000/- अमरीकी डॉलर)?

उत्तर: इस योजना के तहत किये गये विप्रेषण एडीआर/जीडीआर से संबद्ध कर्मचारी स्टाक विकल्प योजना(इएसओपीएस) के तहत अभिग्रहण के अतिरिक्त है।

प्रश्न 12. क्या यह योजना अर्हता शेयरों के अभिग्रहण के अतिरिक्त है (अर्थात् 20,000/- अमरीकी डॉलर अथवा विदेशी कंपनी की चुकता पूंजी के 1 %, में से जो भी कम हो)?

उत्तर: इस योजना के तहत किये गये विप्रेषण अर्हता शेयरों के अभिग्रहण के अतिरिक्त हैं।

प्रश्न 13. क्या कोई निवासी व्यक्ति इस योजना के तहत म्युच्युअल फंडों, वेंचर फंडों की इकाईयों (यूनिटों), गैर-श्रेणीकृत (अनरेटेड) ऋण प्रतिभूतियों, प्रॉमिसरी नोटों, आदि में निवेश कर सकता है?

उत्तर: निवासी व्यक्ति इस योजना के तहत म्युच्युअल फंडों, वेंचर फंडों की इकाईयों (यूनिटों), गैर-श्रेणीकृत (अनरेटेड) ऋण प्रतिभूतियों, प्रॉमिसरी नोटों, आदि में निवेश कर सकता है। इसके अतिरिक्त, निवासी व्यक्ति इस प्रयोजन के लिए विदेश में खोले गये बैंक खाते के जरिये, इस प्रकार की प्रतिभूतियों में, इस योजना के तहत, निवेश कर सकता है।

प्रश्न 14. क्या कोई व्यक्ति, जिसने अनिवासी के रूप में विदेश में कोई ऋण लिया है, भारत में लौटने पर निवासी के रूप में इस योजना के तहत उसकी चुकौती कर सकता है?

उत्तर: इसकी अनुमति है।

प्रश्न 15. क्या इस योजना के तहत जावक विप्रेषण भेजने के लिए निवासी व्यक्तियों के पास पैन नंबर होना अनिवार्य है?

उत्तर: इस योजना के तहत जावक विप्रेषण भेजने के लिए पैन नंबर होना अनिवार्य है।

प्रश्न 16. यदि कोई निवासी व्यक्ति विदेश में उसकी निजी यात्रा के समय मांग ड्राफ्ट (उसके खुद के नाम में अथवा उस लाभार्थी के नाम में, जिसके साथ वह अनुमत लेनदेन करना चाहता है) जारी करने के रूप में जावक विप्रेषण के लिए अनुरोध करता है, तो क्या विप्रेषक स्वयं की घोषणा के आधार पर इस प्रकार का जावक विप्रेषण कर सकता है?

उत्तर: निवासी व्यक्ति द्वारा इस योजना के तहत निर्धारित फॉर्मेट में दिये गये घोषणा पत्र के आधार पर मांग ड्राफ्ट के रूप में इस प्रकार का जावक विप्रेषण किया जा सकता है।

प्रश्न 17. क्या विप्रेषण की बारंबारता पर कोई प्रतिबंध है?

उत्तर: विप्रेषण की बारंबारता पर कोई प्रतिबंध नहीं है। तथापि, किसी वित्तीय वर्ष के दौरान खरीदी गयी विदेशी मुद्रा की कुल राशि तथा भारत में सभी स्त्रोतों के जरिये विप्रेषित कुल राशि 200,000 अमरीकी डॉलर की संचयी सीमा के भीतर होनी चाहिए।

प्रश्न 18. विप्रेषक द्वारा किन बातों का अनुपालन किया जाना आवश्यक है?

उत्तर: विप्रेषणकर्ता व्यक्ति को प्राधिकृत व्यापारी की किसी शाखा को नामित करना होगा जिसके जरिये इस योजना के तहत सभी विप्रेषण किये जाएंगे। आवेदकों को विप्रेषण करने से पहले बैंक के पास कम-से-कम एक वर्ष की अवधि के लिए बैंक खाते बनाये रखने चाहिए। यदि विप्रेषण करने का इच्छुक आवेदक बैंक का नया ग्राहक है तो प्राधिकृत व्यापारी खाता खोलने, परिचालन करने और उसके अनुरक्षण के बारे में समुचित सावधानी (ड्यू डिलीजेंस) की प्रक्रिया का पालन करे। इसके अतिरिक्त, प्राधिकृत व्यापारी आवेदक से उसके पिछले वर्ष के बैंक विवरण प्राप्त करे ताकि वह निधियों के स्त्रोतों के बारे में अपने आप को संतुष्ट कर सके। यदि इस प्रकार के बैंक विवरण उपलब्ध न हों तो नवीनतम आयकर निर्धारण आदेश अथवा आवेदक द्वारा दाखिल की गई आयकर विवरणी की प्रतिलिपि प्राप्त की जाए। विप्रेषण के प्रयोजन के संबंध में विनिर्दिष्ट फॉर्मेट (संलग्नक) में उसे आवेदनपत्र–सह-घोषणापत्र प्रस्तुत करना होगा और घोषित करना होगा कि निधियां उसकी स्वयं की है और उनका उपयोग योजना के तहत प्रतिबंधित अथवा विनियमित (रेगुलेटेड) प्रयोजनों के लिए नहीं किया जाएगा।

प्रश्न 19. क्या कोई व्यक्ति, जिसने वित्तीय वर्ष के दौरान विप्रेषित राशि प्रत्यावर्तित की है, एक बार फिर इस सुविधा का लाभ उठा सकता है?

उत्तर: कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष के दौरान 200,000 अमरीकी डॉलर की राशि का विप्रेषण कर चुकने बाद इस योजना के तहत कोई और विप्रेषण करने के लिए पात्र नहीं होगा, भले ही निवेशों की आगम राशि उसके द्वारा देश में वापस लायी गयी हो।

प्रश्न 20. क्या विप्रेषण केवल अमरीकी डॉलर में ही किए जा सकते हैं?

उत्तर: एक वित्तीय वर्ष में 200,000 अमरीकी डॉलर के समतुल्य किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में विप्रेषण किए जा सकते हैं।

प्रश्न 21. पहले निवासी व्यक्ति, विदेश में किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्स्चेंज में सूचीबद्ध विदेशी कंपनियों, जिनकी भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्स्चेंज में सूचीबद्ध भारतीय कंपनी में न्यूनतम 10 प्रतिशत की शेयरधारिता है, में निवेश कर सकते थे। क्या यह शर्त अब भी लागू है?

उत्तर: निवासी व्यक्तियों द्वारा विदेशी कंपनियों में निवेश की मद 200,000 अमरीकी डॉलर की योजना के अंतर्गत शामिल कर ली गयी है। इस प्रकार की विदेशी कंपनियों द्वारा सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में 10 प्रतिशत की पारस्परिक शेयरधारिता की आवश्यकता संबंधी शर्त अब हटा दी गई है।

भाग-बी:

वित्तीय मध्यवर्ती संस्थाओं के लिए दिशा-निर्देश

प्रश्न 22. क्या ग्राहकों के लिए उपलब्ध विदेशी (समुद्रपारीय) निवेश करने हेतु मध्यवर्ती संस्थाओं को विशिष्ट अनुमोदन लेना अपेक्षित है?

उत्तर: बैंकों, जिनमें भारत में वास्तविक परिचालन नहीं रखनेवाले बैंक शामिल हैं, को उनकी विदेशी/समुद्रपारीय शाखाओं हेतु जमाराशियों के लिए अनुरोध करने हेतु अथवा विदेशी म्युच्युअल फंडों अथवा किसी विदेशी वित्तीय सेवा कंपनी के लिए एजेंटों के रूप में कार्य करने हेतु बैंकिंग परिचालन और विकास विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय भवन, शहीद भगतसिंह मार्ग, मुंबई से पूर्व अनुमोदन लेना आवश्यक है।

प्रश्न 23. कोई व्यक्ति ऋण अथवा ईक्विटी लिखतों में निवेश कर सकता है, तो क्या उसके प्रकार/क्वालिटी पर कोई प्रतिबंध है?

उत्तर: उदारीकृत विप्रेषण योजना के तहत कोई रेटिंग अथवा दिशा-निर्देश निर्धारित नहीं किये गये हैं। तथापि, निवेशकर्ता व्यक्ति को इस योजना के तहत निवेश के संबंध में निर्णय लेते समय अपेक्षित सावधानी बरतना आवश्यक है।

प्रश्न 24. क्या इस प्रकार की जमाराशियों की प्रतिभूति पर भारतीय रूपए अथवा विदेशी मुद्रा में क्रेडिट सुविधा अनुमत होगी?

उत्तर: नहीं। इस योजना में जमाराशियों की प्रतिभूति पर क्रेडिट सुविधा प्रदान करने की परिकल्पना नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त, बैंकों को निवासी व्यक्तियों के लिए इस योजना के तहत जावक विप्रेषण सुकर बनाने के लिए किसी प्रकार की क्रेडिट सुविधा नहीं देनी चाहिए।

प्रश्न 25. क्या बैंकर इस योजना के तहत निवासियों के लिए भारत में विदेशी मुद्रा खाते खोल सकते हैं?

उत्तर: नहीं। भारत में बैंक इस योजना के तहत निवासियों के लिए भारत में विदेशी मुद्रा खाते नहीं खोल सकते हैं।

प्रश्न 26. क्या भारत में किसी अपतटीय बैंकिंग इकाई (ओबीयू) को इस योजना के तहत निवासियों द्वारा विदेशी मुद्रा खाते खोलने के प्रयोजन के लिए भारत के बाहर के बैंक की शाखा के समान समझा जाएगा?

उत्तर: नहीं। इस योजना के प्रयोजन के लिए भारत में किसी अपतटीय बैंकिंग इकाई (ओबीयू) को भारत में किसी बैंक की विदेशी शाखा के रूप में नहीं समझा जाता है।

सामान्य जानकारी

अधिक जानकारी/दिशा-निर्देश के लिए कृपया विदेशी मुद्रा का कारोबार करने के लिए प्राधिकृत किसी बैंक अथवा रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग वाले क्षेत्रीय कार्यालयों से संपर्क करें।


संलग्नक

निवासी व्यक्ति के लिए 200,000 अमरीकी डालर की उदारीकृत विप्रेषण योजना के तहत विदेशी मुद्रा खरीदने के लिए आवेदन-सह-घोषणा-पत्र

(आवेदक द्वारा भरा जाए)

I. आवेदक के ब्योरे

ए. नाम
बी. पता
सी. खाता सं.
डी. स्थायी खाता संख्या (PAN No.)

II. अपेक्षित विदेशी मुद्रा के ब्योरे

1. राशि (मुद्रा के नाम का विशेष रूप से उल्लेख करें)
2. प्रयोजन

III. निधियों के स्रोत

IV. लिखत का प्रकार

ड्राफ्ट ------------------------------------------------------------------------------
प्रत्यक्ष विप्रेषण----------------------------------------------------------------------

V. वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) 200---200-- में इस योजना के तहत किए गए विप्रेषण के ब्योरे

दिनांक : ___________
राशि :___________

VI. हिताधिकारी (लाभार्थी) के ब्योरे

1. नाम :-------------------------------------------------------------------------------------------
2. पता :--------------------------------------------------------------------------------------------
3. देश :--------------------------------------------------------------------------------------------
*4. बैंक का नाम और पता--------------------------------------------------------------
*5. खाता सं.---------------------------------------------------------------------------
(*सिर्फ तभी आवश्यक है जब लाभार्थी के बैंक खाते में विप्रेषण सीधे जमा किया जाना है)

आपको प्राधिकृत किया जाता है कि आप मेरे खाते को नामे करें और विदेशी मुद्रा का विप्रेषण करें/उपर्युक्त ब्योरे के अनुसार ड्राफ्ट जारी करें (जो लागू न हो उसे काट दें)।

घोषणा

मैं, . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . एतद्द्वारा घोषणा करता/करती (नाम) हूं कि आवेदनपत्र की मद सं. V के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष के दौरान भारत में सभी स्रोतों से खरीदी गई अथवा के माध्यम से विप्रेषित की गई कुल विदेशी मुद्रा, जिसमें घनिष्ठ रिश्तेदार (रों) को रुपए में दिए गए ऋण या उपहार जो उनके एनआरओ खाते में जमा किये गए, शामिल हैं, 200,000 अमरीकी डॉलर (दो लाख अमरीकी डॉलर मात्र) की सीमा के अंदर है जो इस प्रयोजन के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित सीमा है तथा प्रमाणित करता/करती हूं कि उपर्युक्त विप्रेषण के लिए प्रयुक्त निधियों के स्रोत मेरे हैं और इनका उपयोग निषिद्ध प्रयोजनों के लिए नहीं किया जाएगा।

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आवेदक के हस्ताक्षर
(नाम)---------------------------

प्राधिकृत व्यापारी द्वारा प्रमाणपत्र

यह प्रमाणित किया जाता है कि विप्रेषण अपात्र कंपनियों (एंटिटीज़) द्वारा/को नहीं किया जा रहा है और यह कि विप्रेषण योजना के तहत, समय-समय पर, रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अनुदेशों के अनुरूप है।

प्राधिकृत अधिकारी का नाम और पदनाम:

स्थान :

हस्ताक्षर :

दिनांक : स्टैम्प और मुहर

 
 
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