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पण्यों में कीमत जोखिम का बचाव

(29 फरवरी 2012 तक)

भारत में निवास करने वाले व्यक्ति को आयातित/निर्यातित पण्य की कीमत संबंधी जोखिम, घरेलू लेनदेनों, मालभाड़ा जोखिम, आदि की हेजिंग (बचाव) के लिए, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंकों के मार्फत भारत से बाहर की पण्य मंडियों अथवा बाज़ारों में/के साथ संविदा/एं करने की अनुमति है। यहाँ प्राथमिक रूप में, प्राधिकृत व्यापारी बैंकों की भूमिका समय-समय पर मार्जिन अपेक्षाओं के लिए, अंतर्निहित एक्सपोज़रों के सत्यापन के तहत, विदेशी मुद्रा राशियों का विप्रेषण करना है। प्राधिकृत व्यापारी प्रत्यायोजित मार्ग और रिज़र्व बैंक से अनुमोदन मार्ग जैसे दो चैनेलों (मार्ग) के जरिये निवासी इनकी हेजिंग कर सकते हैं। पण्य की कीमत से संबंधित जोखिम की हेजिंग को विनियमित करने वाले नियमों/ दिशानिर्देशों के बाबत और स्पष्टता लाने की दृष्टि से, पण्य हेजिंग से संबंधित प्रक्रिया और विभिन्न परिचालनगत मुद्दों/मामलों पर स्पष्टीकरण नीचे दिए जा रहे हैं:

ए. पण्य हेजिंग

1. हेजिंग (बचाव) कौन कर सकता है?

पण्य संबंधी जोखिम तथा पण्य की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम का सामना करने वाला भारत में निवासी व्यक्ति फ्यूचर्स ऐण्ड ऑप्शन्स जैसे एक्स्चेंज ट्रेडेड और ओवर दि काउंटर (ओटीसी) डेरिवेटिव, जो रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर अनुमत किए गए हैं, का हेजिंग के लिए उपयोग करके अंतर्राष्ट्रीय पण्य मंडियों (एक्सचेंजों)/बाजारों में कीमत संबंधी जोखिम की हेजिंग (से बचाव) कर सकता है। इसके लिए रिज़र्व बैंक/किसी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक का पूर्वानुमोदन लेना आवश्यक है।

2. तेल कंपनियों को कौन सी हेजिंग सुविधाएं उपलब्ध हैं?

रिज़र्व बैंक ने, अनुमोदित/प्रत्यायोजित मार्गों के जरिये, तेल की कीमत की हेजिंग के लिए निम्नलिखित सुविधाओं की अनुमति दी है:

ए. अंडरलाइंग संविदाओं के आधार पर कच्चे तेल के आयात और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से उत्पन्न जोखिमों की हेजिंग करना।

बी. पिछले वर्ष के दौरान वास्तविक आयातों की मात्रा के 50 प्रतिशत अथवा पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान आयातों की औसत मात्रा के 50 प्रतिशत, जो भी उच्चतर है, तक पूर्व निष्पादन के आधार पर कच्चे तेल के आयात से उत्पन्न जोखिम की हेजिंग करना।

सी. पिछली तिमाही से पूर्ववर्ती तिमाही में मात्राओं के 50 प्रतिशत तक स्टाक की हेजिंग   करना

डी. अंडरलाइंग संविदाओं के आधार पर कच्चे तेल की घरेलू खरीद और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से उत्पन्न जोखिम की हेजिंग करना।

ई. जेट ईंधन के आयात/निर्यात तथा घरेलू हवाई कंपनियों जैसे उपयोगकर्ताओं द्वारा जेट इंधन की घरेलू खरीद पर जोखिम की हेजिंग करना।

3. किन कंपनियों को तेल की कीमत संबंधी जोखिम की हेजिंग के लिए अनुमति दी गयी है ?

ए. घरेलू तेल परिष्करण और मार्केटिंग कंपनियों को विदेशी एक्स्चेंजों/बाजारों में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों संबंधी कीमत में घट-बढ़ के प्रतिकूल परिणाम को अनुकूल बनाने के लिए तत्संबंधी जोखिम की हेजिंग करने के लिए अनुमति दी गयी है।

बी. विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) के घरेलू उपयोगकर्ताओं को भी विदेशी एक्स्चेंजों/ओटीसी बाजारों में एटीएफ की कीमत संबंधी जोखिम की हेजिंग के लिए अनुमति दी गयी है।

4. पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों से भिन्न ऐसे कौन से पण्य हैं, जिनकी अंतर्राष्ट्रीय एक्स्चेंजों में हेजिंग की जा सकती है ?

ए. रिज़र्व बैंक ने कंपनियों को, प्रत्यायोजित मार्ग के तहत, अंतर्राष्ट्रीय पण्य एक्स्चेंजों/बाजारों में किसी पण्य (सोना, चांदी, प्लैटिनम को छोड़कर) के आयात/निर्यात से संबंधित कीमत के बाबत जोखिम की हेजिंग के लिए अनुमति दी है। कीमत संबंधी जोखिम की हेजिंग की इच्छुक पात्र कंपनी, अपने आयात/निर्यात के संबंध में प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक को आवेदन कर सकती है।

बी. रिज़र्व बैंक ने किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्स्चेंज में सूचीबद्ध कंपनियों को भी, प्रत्यायोजित मार्ग के तहत, एल्युमिनियम, तांबे, सीसे, निकिल और जिंक की घरेलू खरीद और बिक्री संबंधी कीमतों के जोखिम की हेजिंग के लिए अनुमति दी है। उल्लिखित पण्यों की कीमत से संबंधित जोखिम की हेजिंग की इच्छुक पात्र कंपनी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक को आवेदन कर सकती है।

5. विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेडएस) में कार्यरत कंपनियों के लिए कौन सी हेजिंग सुविधाएं अनुमत हैं ?

प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंकों को यह अनुमति दी गई है कि वे विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेडएस) में कार्यरत कंपनियों द्वारा आयात/निर्यात गत पण्यों की कीमतों के संबंध में विदेशी पण्य एक्स्चेंजों/बाजारों में किए जाने वाले लेनदेनों की हेजिंग करने के लिए अनुमति प्रदान कर सकते हैं। ऐसे लेनदेनों के लिए केवल तभी अनुमति है, जब आयात/निर्यात लेनदेन विशेष आर्थिक क्षेत्र की ऐसी इकाइयों से संबंधित हों जिनके वित्तीय संबंध मुख्य भूभाग अथवा विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित अपनी मूल अथवा सहायक कंपनी/कंपनियों से पूरी तरह से अलग हों।

बी. मालभाड़ा के लिए हेजिंग

1. मालभाड़ा डेरिवेटिव क्या है?

मालभाड़ा डेरिवेटिव एक वित्तीय लिखत है, जिसकी लागत (वैल्यू) मालभाड़ा दरों जैसे ''ड्राई बल्क'' ले जाने की दरों और तेल टैंकरों की दरों के भविष्य के स्तरों की दरों के आधार पर निकाली जाती है। मालभाड़ा डेरिवेटिव का उपयोग मुख्यत: अंतिम उपयोगकर्ताओं जैसे जहाज मालिक तथा बड़े भंडार गृहों, आपूर्तिकर्ताओं जैसे तेल परिष्करण और मार्केटिंग कंपनियों द्वारा जोखिम का प्रबंध करने तथा आपूर्ति श्रृंखला में कीमत अस्थिरता से बचाव के लिए किया जाता है।

2. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा मालभाड़ा जोखिम के बचाव (की हेजिंग) के लिए किन संस्थाओं(एंटिटीज़) को अनुमति दी गयी है?

तेल परिष्करण और मार्केटिंग कंपनियाँ, जहाजरानी कंपनियाँ तथा अन्य कंपनियाँ, जिन्हें मालभाड़ा घटक के कारण काफी खर्चे आते हैं, उन्हें अंडरलाइंग एक्सपोज़र के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय एक्स्चेंजों/ओटीसी बाजारों में मालभाड़ा जोखिम की हेजिंग (के बचाव) के लिए अनुमति दी गयी है। तेल और जहाजरानी कंपनियों को प्रत्यायोजित मार्ग अर्थात प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंकों के जरिये हेजिंग (के बचाव) करने के लिए अनुमति दी गयी है तथा मालभाड़ा एक्स्पोज़र वाली अन्य कंपनियों को रिज़र्व बैंक से पूर्वानुमोदन प्राप्त करने पर हेजिंग करने (के बचाव) के लिए अनुमति दी गयी है।

 
 
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