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मास्टर परिपत्र- कारपोरेट गवर्नेंस

भारिबैं/2014-15/36
गैबैंपवि(नीति प्रभा.)कंपरि.सं.390/03.10.001/2014-15

1 जुलाई 2014

सभी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (एनबीएफसी)

महोदय,

मास्टर परिपत्र- कारपोरेट गवर्नेंस

सभी मौजूदा अनुदेश एक स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने उल्लिखित विषय पर 30 जून 2014 तक जारी सभी अनुदेशों को समेकित किया है। यह नोट किया जाए कि परिशिष्ट में सूचीबद्ध अधिसूचनाओं में अंतर्विष्ट सभी अनुदेश, जहाँ तक वे इस विषय से संबंधित हैं, मास्टर परिपत्र में समेकित एवं अद्यतन कर दिये गये हैं। मास्टर परिपत्र बैंक की वेब साइट (http://www.rbi.org.in). पर भी उपलब्ध है।

भवदीय,

(के के वोहरा)
प्रधान मुख्य महाप्रबंधक


विषय सूची

पैरा न:

विवरण

I

कारपोरेट गवर्नेंस पर दिशानिर्देश

 

1. लेखापरीक्षा समिति का गठन

 

2. नामांकन समिति का गठन

 

3. जोखिम प्रबंधन समिति का गठन

 

4. प्रकटीकरण तथा पारदर्शिता

 

5. संबद्ध उधार(कनेक्टेड लेंडिंग)

II

50 करोड़ रुपये और अधिक की जनता की जमाराशियों/जमाराशियों वाली कंपनियों के सांविधिक लेखापरीक्षकों की लेखापरीक्षा फर्म के भागीदारों का आवर्तन (Rotation)

 

परिशिष्ट

I. कारपोरेट गवर्नेंस पर दिशानिर्देश

1चूंकि यह सुस्पष्ट है कि विगत कुछ वर्षों से अच्छे कारपोरेट गवर्नेंस की आवश्यकता पर अधिक जोर दिया जा रहा है। भू-मंडलीय स्तर पर कंपनियाँ निवेशकों तथा स्टेक होल्डरों का विश्वास बढ़ाने के लिए उत्तम कारपोरेट व्यवहार को अपना रही हैं। कारपोरेट गवर्नेंस कारपोरेट क्षेत्र में स्टेक होल्डरों के हितों की रक्षा की मुख्य चाबी है। इसकी सार्वभौमिक प्रयोज्यता, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए कोई अपवाद नहीं हैं क्योंकि वे भी तो अनिवार्यत: कारपोरेट कंपनियाँ ही हैं। सूचीबद्ध गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से अपेक्षा है कि वे सेबी द्वारा निर्मित सूचीबद्ध होने के कारार एवं नियमों का पालन करें जिनमें उनसे पहले से ही अपेक्षित है कि वे कारपोरेट गवर्नेंस पर सेबी के निर्धारणों का अनुपालन करें।

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ उत्तम व्यवहार अपना सकें और उनके परिचालनों में उच्चतर पारदर्शिता रहे, इसके लिए निम्नलिखित दिशानिर्देशों का प्रस्ताव, 20 कारोड़ रुपए की जमाराशियों वाली सभी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों एवं 100 करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों वाली जमाराशियाँ न स्वीकारने वाली सभी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC-ND-SI) के निदेशक बोर्ड के विचारार्थ दिया जा रहा है।

1. लेखापरीक्षा समिति का गठन

मौजूदा अनुदेशों के अनुसार अंतिम (latest) लेखापरीक्षित तुलनपत्र के अनुसार जिस गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी की परिसंपत्तियाँ 50 करोड़ रुपए या अधिक हैं, उनसे पूर्वापेक्षा है कि वे लेखापरीक्षा समिति का गठन करें जिसमें निदेशक बोर्ड के कम से कम 3 सदस्य अवश्य हों, ये अनुदेश लागू हैं।

इसके अलावा जमाराशियाँ स्वीकारने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी जिसके पास 20 करोड़ रुपए की जमाराशियाँ हैं, वह भी इसी आधार पर लेखापरीक्षा समिति का गठन करने पर विचार करे।

2. नामांकन समिति का गठन

"सही एवं उपयुक्त" प्रमाणन/प्रत्यय वाले निदेशकों की नियुक्ति का महत्त्व वित्तीय क्षेत्र में अच्छी तरह मान्यता प्राप्त है। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-झक(4)(ग) के अनुसार गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी का कारोबार करने के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र की मंजूरी के लिए प्रस्तुत आवेदनपत्र पर विचार करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि गैर बैंकिग वित्तीय कंपनी के प्रबंधन या प्रस्तावित प्रबंधन का चरित्र वर्तमान एवं भावी जमाकर्ताओं के हितों के विरुद्ध नहीं होगा। इस खंड (segment) के प्रति विभिन्न कंपनियों/संस्थाओं द्वारा प्रदर्शित रुचि के मद्देनज़र यह समीचीन होगा कि जमाराशियाँ स्वीकारने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ जिनके पास 20 करोड़ रुपए या अधिक की जमाराशियाँ हैं तथा एनबीएफसी-एनडी-एसआई एक नामांकन समिति का गठन करे जो प्रस्तावित/मौजूदा निदेशकों के संबंध में उनके "सही एवं उचित" दर्जे के होने को सुनिश्चित करेगी।

3. जोखिम प्रबंधन समिति का गठन

लेखापरीक्षित अंतिम तुलनपत्र के अनुसार जिस गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के पास जनता की जमाराशियाँ 20 करोड़ रुपए या अधिक हैं या जिनकी परिसपंत्तियाँ 100 करोड़ रुपए या अधिक हैं, उनके बाजार जोखिम की निगरानी परिसंपत्ति देयता प्रबंधन समिति द्वारा की जाती है जो परिसंपत्ति-देयता अंतर की निगरानी तथा संबंधित जोखिम को कम करने के लिए कार्रवाई की रणनीति बनाती है। उल्लिखित श्रेणी की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए गठित परिसंपत्ति देयता प्रबंधन समिति (ALCO) के अलावा एकीकृत जोखिम के प्रबंधन के लिए एक जोखिम प्रबंधन समिति का गठन भी उनके लिए होना चाहिए।

4. प्रकटीकरण तथा पारदर्शिता

निम्न प्रकार की सूचना गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी द्वारा उसके निदेशक बोर्ड को बोर्ड द्वारा किए गए विनिर्देशन के अनुसार नियमित अंतराल पर प्रस्तुत की जानी चाहिए:

  • प्रगतिशील जोखिम प्रबंधन प्रणाली तथा जोखिम प्रबंधन नीति को लागू करने में हुई प्रगति एवं अपनायी गई रणनीति।

  • कारपोरेट गवर्नेंस मानदण्डों का पालन अर्थात विभिन्न समितियों के गठन, उनकी भूमिकाएं एवं कार्य, बैठकों की आवधिकता तथा कवरेज के साथ अनुपालन तथा समीक्षा कार्य, आदि।

5. संबद्ध उधार (कनेक्टेड लेंडिंग)

जैसा कि 11 जुलाई 2007 का गैबैंपवि.नीप्र/कंपरि.104/03.10.042/2007-08 में सूचित किया गया था कि संबद्ध उधार के संबंध में जारी अनुदेशों को अंतर्विष्ट करने वाले 28 मई 2007 के परिपत्र के पैराग्राफ 2(vi) की प्रयोज्यता समीक्षा होने तक अस्थगित रखा जाएगा।

6. गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ कारपोरेट गवर्नेंस पर अपने दिशानिर्देश बना सकती हैं जिससे इनका दायरा बढ़ेगा किन्तु उक्त दिशानिर्देशों की बलि की कीमत पर नहीं। विभिन्न स्टेक होल्डरों की सूचना के लिए उसे कंपनी की वेबसाइट, यदि कोई हो, पर प्रकाशित किया जाए।

II. 250 करोड़ रुपये और अधिक की जनता की जमाराशियों/जमाराशियों वाली कंपनियों के सांविधिक लेखापरीक्षकों की लेखापरीक्षा फर्म के भागीदारों का आवर्तन (Rotation)

विगत कुछ वर्षों से अच्छे कारपोरेट गवर्नेंस की आवश्यकता पर अधिक जोर दिया जा रहा है। भू-मंडलीय स्तर पर कंपनियाँ निवेशकों तथा स्टेक होल्डरों का विश्वास बढ़ाने के लिए उत्तम कारपोरेट व्यवहार को अपना रही हैं। लेखा-बहियों की जांच/संवीक्षा करने वाले लेखापरीक्षकों को आवर्तित (रोटेशन) करने से कारपोरेट गवर्नेंस के महत्त्व को और मजबूती प्राप्त होगी।

2. इस संबंध में यह समीचीन होगा कि 50 करोड़ रुपये और अधिक की जनता की जमाराशियों/ जमाराशियों वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ अपनी कंपनी की लेखापरीक्षा करने के लिए नियुक्त लेखापरीक्षा फर्म के भागीदारों द्वारा लेखापरीक्षा किये जाने में आवर्तन (रोटेशन) का विनिर्देशन करें। लेखापरीक्षा करने वाली सनदी लेखा परीक्षा फर्म के भागीदार हर तीसरे साल पर आवर्तित किये जाएं ताकि एक ही भागीदार लगातार तीन साल से अधिक कंपनी की लेखापरीक्षा न करे। तथापि, इस प्रकार आवर्तित भागीदार तीन साल के अंतराल के बाद गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी की लेखापरीक्षा करने के लिए फिर से पात्र होगा, यदि कंपनी ऐसा करने का निर्णय ले। कंपनियाँ लेखापरीक्षा फर्म के नियुत्ति पत्र में इस आशय की शर्त शामिल करें और इसका अनुपालन सुनिश्चित करें।


परिशिष्ट

क्र.

परिपत्र सं.

दिनांक

1.

गैबैंपवि.(नीति प्रभा.) कंपरि.सं.61/02.82/2005-06

12 दिसंबर 2005

2.

गैबैंपवि.नीति प्रभा./कंपरि.सं.94/03.10.042/2006-07

8 मई 2007

3.

गैबैंपवि.नीति प्रभा./कंपरि.सं.104/03.10.042/2007-08

11 जुलाई 2007


1 08 मई 2007 का गैबैंपवि.नीप्र/कंपरि.94/03.10.042/2006-07 द्वारा जोड़ा गया।

2 12 दिसम्बर 2005 का गैबैंपवि(नीप्र)कंपरि.सं.61/02.82/2005-06 द्वारा जोड़ा गया।

 
 
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