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भारतीय रिज़र्व बैंक ने निजी क्षेत्र में नए बैंकों को लाइसेंस देने के लिए प्रारूप दिशानिर्देश जारी किया

29 अगस्‍त 2011

भारतीय रिज़र्व बैंक ने निजी क्षेत्र में नए बैंकों को
लाइसेंस देने के लिए प्रारूप दिशानिर्देश जारी किया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी वेबसाइट पर ''निजी क्षेत्रों में नए बैंकों को लाइसेंसे देने के लिए'' प्रारूप दिशानिर्देश जारी किया। रिज़र्व बैंक ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्‍थाओं, औद्योगिक गृहों, अन्‍य संस्‍थाओं तथा व्‍यापक रूप से आम जनता से प्रारूप दिशानिर्देश पर विचार/टिप्‍पणियॉं मॉंगी है। इस प्रारूप दिशानिर्देश पर सुझाव और अभिमत 31 अक्‍टूबर 2011 तक मुख्‍य महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंकिंग परिचालन और विकास विभाग, केंद्रीय कार्यालय, 13वीं मंजि़ल, केंद्रीय कार्यालय भवन, शहीद भगत सिंह मार्ग, मुंबई-400001 को भेजे जा सकते हैं अथवापर इ-मेल किए जा सकते हैं।

अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे तथा निजी क्षेत्र में नए बैंकों के गठन के लिए आवेदन आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस प्रारूप दिशानिर्देश पर प्रतिसूचना, अभिमत और सुझाव प्राप्‍त होने के बाद बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 में कतिपय महत्‍वपूर्ण संशोधन किए जाने के बाद ये दिशानिर्देश लागू होंगे।

इस प्रारूप दिशानिर्देश की मुख्‍य विशेषताएं इस प्रकार हैं :

(i) पात्र प्रवर्तक : निजी क्षेत्र में निवासियों द्वारा स्‍वाधिकृत और नियंत्रित, विविधतापूर्ण स्‍वामित्‍व वाली, सुदृढ परिचय और विश्‍वनीयता तथा कम-से-कम 10 वर्षों के सफल कार्यनिष्‍पादन वाली संस्‍थाएं/समूह बैंकों को प्रवर्तित करने के पात्र होंगे। वैसी संस्‍थाएं/समूह जिनके पास भू-संपदा विनिर्माण से और/अथवा पिछले तीन वर्षों में अलग-अलग ब्रोकिंग गतिविधियॉं से उल्‍लेखनीय रूप से आय (10 प्रतिशत अथवा अधिक) अथवा आस्तियॉं अथवा कुल मिलाकर दोनों हैं, वे पात्र नहीं होंगी।

(ii) कंपनी संरचना : नए बैंकों का गठन केवल रिज़र्व बैंक के पास एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में पंजीकृत होने वाली पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली गैर-परिचालन धारिता कंपनी (एनओएचसी) के माध्‍यम से किया जाएगा जो बैंक के साथ-साथ अन्‍य सभी वित्तीय कंपनियों को प्रवर्तक समूह में रखेगी।

(iii) न्‍यूनतम पूँजी अपेक्षा : न्‍यूनतम पूँजी अपेक्षा 500 करोड़ रुपये होगी। इसके अंतर्गत लाये जाने वाली वास्‍तविक पूँजी प्रवर्तकों की कारोबारी योजना पर आधारित होगी। गैर-परिचालन धारिता कंपनी (एनओएचसी) बैंक को लाइसेंस दिए जाने की तारीख पॉंच वर्षों की अवधि के लिए बैंक की चुकता पूँजी के न्‍यूनतम 40 प्रतिशत तक धारण करेगी। गैर-परिचालन धारिता कंपनी (एनओएचसी) द्वारा 40 प्रतिशत से अधिक की शेयर धारिता बैंक को लाइसेंस दिए जाने की तारीख से 10 वर्षों के भीतर 20 प्रतिशत तक और  12 वर्षों के भीतर 15 प्रतिशत तक नीचे लाई जाएगी।

(iv) विदेशी शेयर धारिता : नए बैंक में सकल अनिवासी शेयर धारिता पहले 5 वर्षों के लिए 49 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी जिसके बाद यह विद्यमान नीति के अनुसार होगी।

(v) कंपनी अभिशासन : गैर-परिचालन धारिता कंपनी (एनओएचसी) के कम-से-कम 50 प्रतिशत निदेशक स्‍वतंत्र निदेशक होने चाहिए। कंपनी संरचना ऐसी हो कि वह रिज़र्व बैंक द्वारा समेकित आधार पर बैंक और गैर-परिचालन धारिता कंपनी (एनओएचसी) के प्रभावी पयर्वेक्षण को बाधित न करें।

(vi) कारोबारी प्रतिदर्श : इसे वास्‍तविक और व्‍यवहार्य होना चाहिए तथा बैंक जिस प्रकार वित्तीय समावेशन प्राप्‍त करने का प्रयोजन रखता है उसका समाधान उसे करना चाहिए।

(vii) अन्‍य शर्तें :

  • किसी प्रवर्तक समूह में किसी संस्‍था में बैंक का एक्‍सपोज़र 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा और इस समूह में सभी संस्‍थाओं में सकल एक्‍सपोज़र बैंक की चुकता पूँजी और प्रारक्षित निधि के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

  • लाइसेंस प्राप्‍त करने के दो वर्षों के भीतर बैंक शेयर बाज़ारों में सूचीबद्ध अपने शेयर प्राप्‍त करेगा।

  • बैंक सुविधा रहित ग्रामीण केंद्रों (वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार 9,9999 की आबादी तक) बैंक अपनी शाखाओं का कम-से-कम 25 प्रतिशत खोलेगा।

  • विद्यमान गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियॉं यदि पात्र समझी जाती हैं तो उन्‍हें एक नए बैंक का प्रवर्तन करने अथवा स्‍वयं को बैंकों में परिवर्तित करने की अनुमति दी जाए।

(Viii) गैर-वित्तीय कारोबार से 40 प्रतिशत अथवा इससे अधिक आस्ति/आय वाले प्रवर्तक समूहों के संबंध में कतिपय अतिरिक्‍त अपेक्षाएं निर्धारित की गई हैं।

पृष्‍ठभूमि

यह स्‍मरण होगा कि अपने बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणा और वर्ष 2010-11 के लिए रिज़र्व बैंक की वार्षिक नीति वक्‍तव्‍य के अनुपालन में 'निजी क्षेत्र में नए बैंकों का प्रवेश' पर एक चर्चा पेपर 11 अगस्‍त 2010 को भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर डाला गया था। इस चर्चा पेपर में अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यवहारों, भारतीय अनुभव के साथ-साथ विद्यमान स्‍वामित्‍व और अभिशासन (ओएण्‍डजी) दिशानिर्देशों को क्रमबद्ध किया गया था। रिज़र्व बैंक ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्‍थाओं, औद्योगिक गृहों, अन्‍य संस्‍थाओं और व्‍यापक रूप से आम जनता से विचारों/टिप्‍पणियों की मॉंग की थी। इस पेपर में उठाए गए मुद्दों पर प्रमुख स्‍टेकधारकों से उनके अभिमत और सुझाव की मॉंग हेतु उनसे चर्चा भी की गई थी। इ-मेल और पत्रों तथा चर्चाओं के माध्‍यम से प्राप्‍त विभिन्‍न मुद्दों पर अभिमत का सारांश 23 दिसंबर 2010 को रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर डाला गया था। यह प्रारूप दिशानिर्देश प्राप्‍त प्रतिक्रियाओं, व्‍यापक आंतरिक चर्चाओं तथा भारत सरकार के परामर्श के आधार पर तैयार किया गया है।

अजीत प्रसाद
सहायक महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी : 2011-2012/322

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